मैं, आप और सबीर भाटिया

पिछले दिनों जब मैंने अपना मेल आई डी अपने एक मित्र को दिया तो उन्‍होंने कहा कि ये तो काफी पुराना हो गया, आजकल तो जी-मेल का जमाना है। वैसे बीच में मैंने सुना था कि हॉटमेल तो चार्जेबल हो गया है तो भैया मेरे दिल में आया कि कैसे दिन बीत जाते हैं। अभी कल परसों की ही तो बात लगती है, जब हॉटमेल का प्रयोग करने के बारे में मैंने सोचना शुरू किया था। उस समय कम्‍प्‍यूटर नया नया सीखा था, इंटरनेट क्‍या बला है ठीक से जानता भी नहीं था शायद, मगर चस्‍का लग गया ई-मेल अकाउंट खोलने का। काफी डर-डर के वो ई-मेल अकाउंट खोला था।
खैर मैं बात कर रहा था अपने, आपके और सबीर भाटिया के बारे में । तो बंधु बात यूं है कि मैं उसी दिन से काफी उद्वेलित हो गया और उस भारतीय के नाम को याद करने लगा जो कि हमने उस वक्‍त बिकने वाली “ताजा-तरीन” पत्रिका में पढा था, जब याद नहीं आया तो हारकर गुरूदेव की शरण में आ गए। तब गूगल बाबा ने याद दिलाया कि सबीर भाटिया नाम का कोई व्‍यक्ति इस देश में हुआ। जिसने दुनिया को विश्‍व की प्रथम http आधारित ई-मेल सुविधा दी, जिसे हम हॉटमेल के नाम से जानते हैं।
नहीं नहीं इतनी छोटी सी बात  बताने के लिए भेजा फ्राई नहीं कर रहा हूँ भई। मैं एक आइना दिखाने की कोशिश कर रहा हूँ, कि कैसे हम भारतीय, कम्‍प्‍यूटिंग जगत में एक भारतीय के अद्वितीय योगदान को भूल गए । मैंने कम्‍प्‍यूटर पर खूब काम करने वाले लगभग 35 लोगों से बात की लेकिन किसी को भी सबीर भाटिया का नाम जबानी याद नहीं था। कुछ लोग तो सुन ही गलत रहे थे। मेरा मतलब ये है कि जब मैंने उनसे पूछा कि क्‍या आप सबीर भाटिया के बारे में जानते हैं ? तो कुछ लोगों ने तो पूछा- समीर भाटिया ? कौन समीर भाटिया ?

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