कितने ऐतिहासिक हैं हम

आपने अक्सर बुजुर्गों को पुरानी बातें बताते हुए, पुराने किस्से सुनाते हुए देखा होगा कि हमारे जमाने में ऐसा था, वैसा था। हमने अपने जीवन में पहली बार सिनेमा कब देखा वगैरह वगैरह। इसी तरह मेरी माताजी भी बताती हैं कि जब वे छोटी थी, तब उन्होंने भारत पाकिस्तान को एक से दो देश बनते देखा। इसी तरह हम अगर सोचें कि हमारे समय में ऐसी क्या क्या ऐतिहासिक बातें या घटनाएं हुई हैं, तो हम हैरान रह जाएंगे कि शायद हम अपने बुजुर्गों से कहीं ज्यादा ऐतिहासिक घटनाओं के समकालीन हैं (भले ही वे सभी घटनाएं हमने स्वयं आंखों से न देखी हों) जैसे-

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बेटी और भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री की हार और हत्या । हालांकि इससे पहले की भी कुछ घटनाएं हैं, लेकिन वे मेरी मेमोरी में नहीं हैं, इसलिए यहां उनका जिक्र नहीं किया।

भारत की कोकिलकण्ठी लता मंगेशकर देखी। हिन्दी फिल्मों का पहला सुपर स्टार राजेश खन्ना को देखा, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को देखा। मोहम्मद रफी और किशोर कुमार सरीखे गायकारों का अंतिम वक्त देखा।

नांबल पुरस्कार विजेता अर्मत्य सेन को देखा। ई मेल की सौगात देने वाले सबीर भाटिया को देखा। भारत का सर्वप्रथम व विश्व का सबसे तेज तथा स्वदेशी सुपर कम्प्यूटर देने वाले डॉक्टर विजय भटकर को देखा। मशहूर सॉफ्टवेयर व्यापारी बिल गेट्स को देखा। Y2K का हौव्वा देखा।

आत्मघाती लिट्टे देखा, राजीव गांधी की हत्या देखी। लालकिले, ताजमहल होटल और भारतीय संसद पर हमला देखा।

अपने समय की सबसे बडी शक्ति अमेरिका से टक्कर लेता एक देश ईराक और उसका नेता सद्दाम हुसैन देखा।

अमेरिका पर हमला देखा, अमेरिका को थर्राते देखा। ओसामा बिन लादेन जैसा आतंकवादी देखा और वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर को ध्वस्त होते देखा।

Landline टेलिफोन को ही नहीं, फैक्स, पीसीओ, मैनुअल डायलिंग और ट्रंक डायलिंग का सिस्टम देखा। पेजर और मोबाइल देखा। बुद्धू कहे जाने वाला बक्सा टीवी सयाना होता हुआ देखा। भारत का पहला एफ एम प्रसारण देखा। सैटेलाइट रेडियो और टीवी सिस्टम का जन्म देखा।

जनता के हित के लिए एक गैर राजनेता 70 साल के बूढे को 13 दिन तक भुख हडताल पर बैठे देखा।

पद पर आसीन रहते हुए भी प्रधानमंत्री (श्री पी वी नरसिंह राव) पर रिश्वत का आरोप देखा।

1984 के सिख विरोधी दंगे देखे। एक हमेशा बिल्क्‍फल्‍ खमोश रहने वाला प्रधानमंत्री लाया

भारत की बेटियों की छातियों से गायब होती चुन्नी और सिर को छोडकर जाता दुपट्टा देखा।

ग्वाले कृष्ण के देश में गायों की दुर्दशा देखी। गायें बिकती और कटती देखीं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपकी टिप्पणी से मुझे कुछ बेहतर लिखने की प्रेरणा व हिम्मत मिलेगी, यकीन मानिए मैं चाहता हूं कि आप मेरे लेखन में कमी भी निकालें और मार्गदर्शन भी करें। कृपया अपनी राय यहां जरूर अंकित करें।

अभी तक इतनी बार यह देखा गया